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Hindi Kahaniya


जल है तो जीवन है।

https://www.youtube.com/watch?v=mXqhKeBTa0I

इस पृथ्वी पर सबसे बहुमूल्य पदार्थ है पानी देखा जाए तो यह अमृत के बराबर है मरते हुए इंसान को मिला दिया जाए तो इसमें जान आ जाती है रेगिस्तान में आ जाए तो रेगिस्तान भी हरा-भरा हो जाता है हमारा जिस भी 70% से ज्यादा पानी है हमारे देश में नदियों को पूजा जाता है और विडंबना इस बात की है इसके बावजूद हमारी नदियां विश्व भर में सबसे ज्यादा प्रदूषित और कुंठित है है और इसके जिम्मेदार हम है थे वॉटर पोलूशन क्या है इस वक्त इस प्रकार हमारे परिवार को और हम को प्रभावित करता
आज के इस एपिसोड में हम नजदीकी से देखते हैं का पानी जिसे अनादिकाल से सम्मान दिया जाता रहा है पानी हमारे ग्रह पर सबसे टीम टीम और शक्तिशाली तत्व [संगीत] है और इसी के बल पर पृथ्वी पर तमाम जीवन कायम रहता है है हुआ है कि अ कि हमारी पृथ्वी एक जलीय ग्रह पृथ्वी की 75 फ़ीसदी से ज़्यादा समय पानी से ठगी है इस पृथ्वी पर जितना कुल पानी मौजूद है उसमें से 97 फीसदी पानी खारा है है लेकिन इसमें से भी 2% उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर बर्फ की शक्ल में जमा है और हमें उपलब्ध नहीं है कि आप बचा 1% इसमें से भी आधा प्रतिशत जमीन की सतह के नीचे भूजल की शक्ल में है और बाकी आधा प्रतिशत बारिश नदियों झीलों और तालाबों के रूप में हमारे लिए उपलब्ध है तो यही आधा प्रतिशत पानी हमारी पृथ्वी को लाखों करोड़ों साल से जिंदा रखे हुए हैं का पानी पृथ्वी पर सबसे ताकतवर तत्व इसे बर्बाद नहीं किया जा सकता सूर्य की किरणों से गर्म होकर यह जलकणों में बदलकर बादलों का रूप धारण कर लेता है हैं पर फिर जब यह बादल ठंडे होते हैं तो वर्षा की शक्ल में पृथ्वी पर लौट आते हैं कि यह प्रकृति का अनूठा जलीय चक्र है जो लाखों साल पुराना है यह चक्र हमारे ग्रह पर साफ और शुद्ध पानी की लगातार आपूर्ति बनाए रखता है कि यह पृथ्वी पर मौजूद पानी को कायम रखते हुए पृथ्वी को जीवंत बनाए रखता है है लेकिन पिछले 40 साल के दौरान इस सब में बदलाव आया है कि विकास की तीसरा अवतार अंधाधुंध प्रगति और पूरी दुनिया में हुई व्यापक खेती में पृथ्वी के ताजे पानी के स्रोतों और भंडारों को बहुत बुरी तरह प्रभावित किया है ए है जिससे न सिर्फ प्रकृति का चक्र प्रभावित हुआ है बल्कि अरबों लोगों की जिंदगी संकट में पड़ गई है कि आज दुनिया के डेढ़ अरब से ज्यादा लोगों की पहुंच पीने के साफ़ सुरक्षित पानी तक नहीं सर 2025 तक यह संख्या बढ़कर ढाई अरब तक हो जाएगी.
हम सभी को जिंदा रहने और हमारी फसलों के लिए पानी की जरूरत होगी है लेकिन अनुमानों से पता चलता है कि हर साल करीब एक अरब मीटर मानव मल मूत्र कचरा औद्योगिक अपशिष्ट और खेतों से बहने वाला रासायनिक अपशिष्ट जिसमें कीटनाशक और औद्योगिक कचरे में निकलने वाली भारी धातुएं होती है वह सीधे ही हमारी नदियों में जल जाती कि इससे न सिर्फ हमारी जल प्रणालियां प्रदूषित होती है बल्कि यह हमारी हार शुक्ला में दाखिल हो गए एक अरब से ज्यादा लोगों बच्चों और महिलाओं की सेहत और जिंदगी के लिए भी खतरा पैदा करती हैं अनुमानों के अनुसार भारत में हर साल जलजनित बीमारियों से 25 लाख से भी ज़्यादा। बच्चे काल के गाल में समा जाते हैं साफ पानी तक पहुंचना होने के अलावा ठीक से सफाई न होना भी इस समस्या की प्रमुख वजह फैन ई वांट मोर दैनिक को प्रदूषित करने वाले जो सबसे जहरीले तत्व हैं उन्हीं में से एक है मैटल ऐसा खतरनाक नुकसान पहुंचाने वाली धातु मिला डिपेंड सीसा कैडमियम और मरक्यूरी शामिल हैं इनकी वजह से मस्तिष्क ठीक से काम नहीं कर पाता और फिर इनकी वजह से सोचने और तर्क करने जैसी कहां प्रभावित होते हैं साथ ही साथ इन प्रभावों की वजह से व्यक्ति अपने अंगों का इस्तेमाल भी ठीक से नहीं कर पाता था कि गंगा हमारी पवित्रतम नदियों से भी पवित्र रहे थे कि यह लाखों-करोड़ों लोगों और किसानों की जीवन रेखा है इसे असंख्य लोग जीवन दायिनी एक मां का दर्जा देते हैं तो कभी इसका पानी एकदम साफ और शुद्ध हुआ करता था लेकिन आप इसे दुनिया की सबसे प्रदूषित नदियों में शुमार किया जाता है कर दो कि इस प्रदूषण का करीब अस्सी फ़ीसदी हिस्सा हमारे घरों से आता है कि बिना शोधित किया हुआ मानव मल मूत्र और सीवेज रोजाना हमारी नदियों में डाल दिया जाता है है इतना ही नहीं फैक्ट्रियों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ और खेतों से निकलने वाला कीटनाशक और रासायनिक द्रव्यों से लबरेज़ पानी इन नदियों में गिरता है।
इनमें चमड़ा रंगने वाली फैक्ट्रियों से निकलने वाला कैंसर पैदा करने वाला कचरा मिला दिया जाता है। स्वास्थ्य अधिकारी और डॉक्टर इस बात से चिंतित हैं कि पानी में सीसा, कैडमियम और अन्य प्रदूषकों जैसी भारी धातुओं की उच्च मात्रा मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। विशेषज्ञों ने यमुना और गंगा के पानी को मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त घोषित किया है। उनका यह भी कहना है कि यह कृषि के लिए भी उपयुक्त नहीं है। प्रयोगशाला परीक्षणों के नतीजे चौंकाने वाले हैं, जिनमें बताया गया है कि पीने के पानी में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया का स्वीकार्य स्तर 100 ग्राम प्रति 100 लीटर है।
यह 100 मिलीग्राम प्रति 50 पीपीएम से कम होना चाहिए। नहाने-धोने के लिए 500 पीपीएम से कम और खेती के लिए 1000 पीपीएम से कम। हरिद्वार में, गंगा में कोलीफॉर्म का स्तर 5500 एमपी3 प्रति 100 मिलीलीटर है, जो पीने के पानी के लिए 50 पीपीएम के स्तर से कहीं ज़्यादा है। कानपुर में, औद्योगिक कचरे की भारी मात्रा के कारण नदी का पानी जहरीला होता जा रहा है। इस औद्योगिक कचरे में क्रोमियम भी होता है, जिसका इस्तेमाल शहर में भी होता है और यह शहर के सीवेज में भी मौजूद होता है। है कि हमारी लगभग सभी नदियों की स्थिति ऐसी ही है कर दो कि राजस्थान में चंबल नदी की कहानी भी कोई अलग नहीं है कि चंबल नदी यमुना की एक बड़ी सहायक नदी है और इसे भारत की एक ऐसी नदी के तौर पर जाना जाता है जो प्रदूषण से मुक्त है लेकिन जैसे ही यह राजस्थान में कोटा में दाखिल होती है यह साफ सुथरी नदी प्रदूषित पानी वाले एक ऐसे तालाब की शक्ल ले लेती है जिसमें खरपतवार और दूसरा ढेर सारा कचरा नजर आता है कोटा शहर के जितने भी गंदे नाले हैं और सब गंदे नाले का पानी इस नदी में गिरता हैं साथ में जो प्लास्टिक है जो पॉलिथीन वगैरह है वह बीच में आकर गिर रहा है मैंने चंबल नदी का पानी घाट पर पानी मैंने इसे पिया है और आज हालत यह है कि इसमें नहाने से भी बीमारी होने का डर रहता है। भारी प्रदूषण के अलावा, विकास और बांधों के निर्माण और अन्य राज्यों द्वारा नदियों का गला घोंटने से भी नदियाँ घुट रही हैं। नदियों के किनारे रहने वाले और अपनी आजीविका के लिए नदियों पर निर्भर मछुआरे इन सब से बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। पकड़ी जाने वाली मछलियों की संख्या कम हो रही है और मछलियों का आकार भी छोटा हो गया है। पहले यमुना में लगभग 100-150 प्रकार की मछलियाँ होती थीं और अब केवल 10 से 15 प्रकार की मछलियाँ ही बची हैं, अब यह सब खत्म हो गया है।
प्रदूषण के कारण सभी नाले नष्ट हो गए हैं, कॉलेज का सीवर यमुना में गिर रहा है, पान वाला खुद यमुना में नाला बनाता है, हम सीवर को तेज करते हैं, नाला बनाते हैं, पूरा घर लार से भरा है, भर रहा है, आप गर्व से भर रहे हैं, सब कुछ पैक हो रहा है, इस समय चीजें भी प्रभावित हो रही हैं, वे भी खराब हो रही हैं। मेंढक, पानी के कछुए और कई जल पक्षी, कई प्रजातियां विलुप्त हो गई हैं और अन्य फसलें विलुप्त होने वाली हैं। रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक हाथों से निकलते हैं जो हमारी जल प्रणाली में प्रवेश करते हैं जिससे खरपतवार और एमबी बढ़ते हैं।
है इससे नदी को ऑक्सीजन की सप्लाई मिलनी बंद हो जाती है मछलियां मर जाती हैं और जलीय आहार श्रंखला के अन्य जीव भी कि उद्योग-धंधों के लिए यह जरूरी है कि वह अपने यहां F1 ट्रीटमेंट प्लांट यानि गंदे पानी को साफ करने वाले संयंत्र लगा लें ताकि नदी में इस पानी को छोड़ने से पहले इसे साफ किया जा सके एक और उसके रासायनिक तत्व दूर हो सके तो कि देश की लगभग सभी नदियां प्रदूषित है और वह धीमी रफ्तार से बहने वाले कचरे में होने वाले नाले बन गई है यमुना भी एक ऐसी ही नदी है दिल्ली इस नदी के किनारे पर बसी एक राजधानी है नई दिल्ली एक विशाल महानगर में तब्दील हो चुकी है।
यहां की आबादी कई गुना बढ़ गई है जिससे इस नदी और ज़मीं दोनों पर ही दबाव बढ़ा है कि यमुना कभी ताकतवर न भी हुआ करती थी लेकिन अब यह एक गंदा नाला बन चुकी है कि शहर भर में फैले 25 बड़े नालों के जरिए नदी में 450 करोड़ मीटर से ज्यादा सीवेज और अपशिष्ट पदार्थों को रोजाना बहा दिया जाता है कर दो में लगातार बढ़ती कॉलोनी एवं और झुग्गी बस्तियों से निकलता सीवेज और औद्योगिक कचरा प्रदूषण के मुख्य कारण है है इस वजह से यह देश की सबसे प्रदूषित नदियों में से एक बन गई है सीपीसीबी के सर्वेक्षण के अनुसार यमुना का पानी की श्रेणी में आता है जिससे यह।
वन्यजीवों मनोरंजन संबंधी गतिविधियों या कृषि योग्य भी नहीं रहता है हुआ है कि यह माना जाता है कि नदी दिल्ली में दाखिल होने से पहले काफी साफ और प्रदूषण मुक्त रहती है लेकिन जब यह वजीराबाद पहुंचती है तो उसकी दुर्गति शुरू हो जाती है के वजीराबाद बैराज से ओखला बैराज के बीच इसमें 15 नालों के जरिए गंदा पानी देता है जिससे यह किसी नदी के बजाए किसी खुले सीवर की शक्ल में बदल जाती है की प्रयोगशालाओं में हुए परीक्षणों से यह पता चला है कि इस पानी में भारी धातुओं घातक रसायनों और कीटनाशकों की मौजूदगी है नई दिल्ली में यमुना की कुल लंबाई करीब 22 किलोमीटर है जो इस नदी का मुश्किल से 2% हिस्सा है पर 70 फ़ीसदी से भी ज्यादा प्रदूषण इसी हिस्से में इसमें शामिल को जाता है कि हमें पानी में जो घना फोन नजर आता है वह रासायनिक अपशिष्ट की भारी मात्रा के कारण ही है इस नदी के ताले में खास तौर पर गर्मियों में जो खेती होती है वह भी नदी को प्रदूषित करने में अपनी भूमिका निभाती है कि यमुना दिल्ली की आबादी के लिए जल आपूर्ति करने वाला मुख्य स्रोत है नई दिल्ली के 70 फ़ीसदी से ज़्यादा निवासी इस पानी को पीते हैं 25 साल से भी ज़्यादा की कोशिशों कानून बनाए जाने अनेकों योजनाओं और करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बावजूद यमुना आज भी पहले जितनी ही गंभीर रूप से प्रदूषित है।
नई दिल्ली में 18 से ज्यादा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट 10 कॉन्फिडेंट प्लांट होने और हजारों वासियों को दूसरी जगह पर बसाए जाने के बावजूद यमुना की सफाई पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा है कि फलों के 1000 गिर और शहर के अंदर मौजूद सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर नजर डालें जो शहर के गंदे पानी को सीधी नदी में पहुंचा देते हैं तो यह बात आपको बहुत चिंता मिला रहेगी कि ज्यादातर अपशिष्ट को यादव बिना ट्रीट किए या फिर आधा अधूरा ट्विट करके बाहर दिया जाता है सिर्फ इसको इस तरह नदी बहाना एक बहुत बड़ी समस्या कहने का मतलब यह कि नदी को दिल्ली शहर के एक नए सिस्टम के तौर पर इस्तेमाल किया ड्रेनेज सिस्टम फॉर द सिटी दिल्ली कहते हैं कि में खुद को साफ करने की क्षमता पर यमुना के मामले में यह क्षमता लाखों लीटर सीवेज और शेयर करें और इस तरह यह नदी एक दम पर और बेहद प्रदूषित हो जाती है कि 1985 में सरकार ने गंगा को साफ करने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना बनाएं कैबिनेट ने अप्रैल 1950 है गंगा एक्शन प्लान या गैप को स्वीकृति दी और यह वादा किया गया कि इस नदी को 5 साल में साफ कर दिया जाएगा इस योजना में 261 योजना थी जो उत्तर प्रदेश बिहार और पश्चिम बंगाल के पश्चिमी शहरों में फैली थी की बदकिस्मती से गंगा आज भी प्रदूषित है अगर हमें इस गंभीर समस्या को सुलझाना है तो विभिन्न स्तरों पर संयुक्त प्रयासों की फौरन जरूरत है अगर आप लोग इस काम में अपनी भूमिका तय नहीं करेंगे तो हमारी सरकार यह राशियों की कोशिशें कामयाब नहीं हो पाएंगे कर दो कि गंगा नदी को हम मानते हैं इसका दर्द करते हैं इसको पूछते हैं लेकिन हमारी सबसे ज्यादा प्रदूषित नदी आज गंगा है कि सरकार हर प्रयास कर रही है इस को स्वच्छ करने के इसको साफ करने के लेकिन सब प्रयास भी सफल रहे 80% से ज्यादा कूड़ा-करकट हमारे घरों से जाता है इसके अलावा रसायनिक खादों का और कीटनाशकों का भी प्रदूषण हमारी नदियों में उड़ेल दिया जाता है है और यह सब हमारे परिवार को हम सबको प्रभावित करता है को स्वेच्छा दिल्ली स्थित युवाओं द्वारा चलाया जाने वाला एक गैर सरकारी संस्थान है जो पर्यावरण और सामाजिक विकास के मुद्दों से जुड़ा है यह संगठन2004 से यमुना यात्राएं चलाता रहा है जिनका मकसद था यमुना नदी के प्रदूषण और अनदेखी को खत्म करना व्यक्ति फिर हम युवाओं के साथ काम करते हैं क्योंकि विरासत में यह नदी उन्हीं को मिलने वाली है जो फिलहाल बहुत बुरी हालत में है लेकिन हमें इसके साथ होने की पूरी उम्मीद है और यह उम्मीद जो गांव के एक जुट होने पर ही कायम रह सकती है तो हमने स्कूलों में कॉलजों में और समुदायों में कई प्रोग्राम शुरू किया है ताकि यमुना नदी के बारे में पहले जागरूकता फैलाई जाए साथ यमुना को बचाने के लिए युवाओं की तरफ से सामूहिक कार्यभार विपक्ष उसे बेवा हम सबको तुरंत यह समझना होगा कि पानी जीवन के लिए अति आवश्यक है और इसकी आपूर्ति सीमित है तो अगर हम इसे प्रदूषित करते हैं और इसका गलत इस्तेमाल करते हैं है तो यह खुद को ही विषाक्त बना है जैसा होगा हम पानी को प्रदूषित कर रहे हैं और इस प्रदूषण का लगभग80 प्रतीशत हिस्सा हमारे घरों से आता है कि हम रोजाना अपनी नदियों में बड़ी मात्रा में जो कचरा फेंकते रहते हैं उसका सामना सरकार अकेले नहीं कर सकती इस बात की फौरी जरूरत है कि कानूनों और निर्माणों को फौरन सख्ती से लागू किया जाए और हमारी नदियों के किनारों पर जो फैक्ट्रियां अपना काम-काज कर रही है उन्हें तुरंत दूसरी जगह बताया जाए नदी के किनारों पर खेती की इजाजत नहीं होनी चाहिए क्योंकि कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों की बड़ी तादाद बढ़कर हमारी नदियों में और फिर हमारी जल प्रणालियों में पहुंच जाती है कि नदियों के किनारे बने मंदिरों के लिए यह आवश्यक होना चाहिए कि वह ऐसे विशेष क्षेत्र बनाएं जहां अस्थियों और फूल मालाओं को पूरे सम्मान के साथ विसर्जित किया जाए तो कि स्थानीय समुदायों और नागरिकों को सामूहिक रूप से प्रयास करना चाहिए कि वह डिटर्जेंट रासायनिक प्रिंट और घरेलू कचरे को नदी में न डालें है मैं इन्हें रसायन हेयर ड्राई इस्तेमाल किए गए मोटर वेहिकल के तेल में है और टॉयलेट क्लीनर जैसे हाइड्रोक्लोरिक एसिड होते हैं कि यह नदी की पर्यावरण प्रणाली के लिए घातक होते हैं और जहां तक संभव को उपलब्ध पानी को रिसाइकल और दोबारा इस्तेमाल करने के बारे में सोचते हैं[संगीत] कि हमारे नहाने और कपड़े धोने से जो पानी निकलता है उसका इस्तेमाल टॉयलेट को भ्रष्ट करने और बाग की सिंचाई जैसी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है जिससे ताजे पानी का इस्तेमाल घाटे का या है जैसे इस एपिसोड में अपने लिखा पानी हमें जीवन देता है पूरी पृथ्वी को हरा-भरा रहता है पर पानी सीमित है और इसकी मात्रा घटती जा रही है लिहाजा बहुत जरूरी है कि हम इन जलस्रोतों को साफ रखें और स्वच्छ रखें और पानी का उपयोग बहुत समझ-बूझकर करें हमारा आज का एपिसोड यह खत्म होता है आशा करते हैं आपको पसंद आया होगा आ अपने सुझाव और विचार हमें जरूर लिए भेजेगा हमें आप खतरों का बेसब्री से इंतजार रहता है अगले हफ्ते आपसे फिर मुलाकात होगी एक नए मुद्दे को लेकर एक नई दिशा में एक नए सफर पर तब तक के लिए अपना ख्याल रखिए का यश


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